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गोल्डन कार्ड खामियों का मुद्दा छाया रहा पेंशनर्स संगठन की बैठक में
बुजुर्गों को आंदोलन के रास्ते पर धकेलने को मजबूर कर रही है सरकार : रयाल
नरेंद्रनगर, 15 मई 2026: सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन शाखा नरेंद्रनगर के की बैठक में एक बार फिर से गोल्डन कार्ड का मुद्दा छाया रहा। बैठक की अध्यक्षता सुंदर सिंह नेगी ने की।
कर्मचारी कल्याण भवन में आयोजित शाखा संगठन के अध्यक्ष धर्म सिंह चौहान व सचिव रघुवीर सिंह भंडारी के संचालन में आयोजित बैठक में एक बार फिर से जहां बरसों से लंबित पड़ा गोल्डन कार्ड की खामियों का मुद्दा फिर से प्रमुखता से छाया रहा।
संगठन के अध्यक्ष धर्म सिंह चौहान तथा सचिव रघुवीर सिंह भंडारी ने कहा कि बरसों-बरसों से गोल्डन कार्ड में आयी खामियों को सरकार व राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण दूर दूर करने के बजाय उलझाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रही है।
संगठन की मांग है कि बुजुर्ग सेवानिवृत्त पेंशन धारकों को समय से चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान किया जाय। साथ ही कहा कि नरेंद्रनगर में कछुआ चाल सीवर लाइन निर्माणाधीन में तेजी लाई जाय।
सड़क पर पड़े मिट्टी, रोड़ी व गारे को व्यवस्थित तरीके से साइड किया जाए, ताकि स्कूल जाने वाले नन्हें बच्चों तथा अन्य लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
क्लर्कस क्वार्टर में लोक निर्माण विभाग द्वारा क्षतिग्रस्त की गई पुरानी बिल्डिंग का मटेरियल नालियों में जमा होने से नालियां अवरुद्ध हो गई हैं और गंदा पानी लोगों के घरों में घुस रहा है। आक्रोश जताया गया कि लिखा पढ़ी के बावजूद भी किसी तरह की सुनवाई नहीं हो रही है।
हर्ष मणी भट्ट ने यात्रा सीजन के दौरान नरेंद्रनगर के सवारियों को ऋषिकेश के नटराज में बस चालकों व परिचालकों द्वारा बस से बाहर उतारने व बस में न चढ़ने देने का मामला उठाया।
इस मामले को लेकर संगठन के सदस्यों में जबरदस्त आक्रोश था। प्रस्ताव पारित किया गया कि यात्रा सीजन के दौरान प्रत्येक बस में नरेंद्रनगर के 5 से 7 सवारियों को अनुमति दी जाय, क्योंकि इस तरह की प्रक्रिया,यात्रा सीजन में विगत वर्षों भी लागू रही है।
उधर प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय मंत्री व प्रवक्ता रहे वाचस्पति रयाल ने गोल्डन कार्ड की खामियों के लिए प्रदेश सरकार व राज्य प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि, सरकार ने शिक्षक-कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर सरकार ने खुद ही गोल्डन कार्ड व आयुष्मान कार्ड योजना बनाई थी।
कहा कि स्लैब वॉइज़ सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का पैसा उक्त योजना के तहत काटा जा रहा है, मगर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। चिकित्सा प्रतिपूर्ति की फाइल राज्य प्राधिकरण के यहां धूल फांक रही हैं।
रयाल ने सरकार की इस नाकामी के लिए पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ० धन सिंह रावत को जिम्मेदार ठहराया।
रयाल ने साफ शब्दों में कहा कि गोल्डन कार्ड और चिकित्सा प्रतिपूर्ति की समस्याओं का समाधान यदि ना हुआ, तो सरकार के विरुद्ध सेवानिवृत्त संगठन न सिर्फ आंदोलन पर उतारू होगा, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सरकार को सबक सिखाने का काम भी करेगा।
रयाल ने कहा कि यदि एक कर्मचारी 20 या 22 वर्ष में सरकारी सेवा में नियुक्त हो जाता है।तो तभी से स्लैब वॉइज़ गोल्डन कार्ड या आयुष्मान योजना के तहत उसकी सैलरी से कटौती होती जाती है।
यदि उसने 85 या 90 वर्षों तक जिंदा रहते हुए कभी उक्त योजनाओं के तहत चिकित्सा लाभ नहीं लिया व बच्चे बेरोजगार भटक रहे हों,तो ऐसी परिस्थितियों में, सरकार के खाते में जमा उसकी 60 से 65 वर्षों की कटौती की धनराशि के हकदार क्या उसके परिजन नहीं हो सकते?
रयाल ने प्रदेश संगठन द्वारा इस तरह का प्रस्ताव प्रदेश सरकार व राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजे जाने का सुझाव दिया और कहा कि जमा धनराशि उसके परिजनों को ब्याज सहित भुगतान की जानी चाहिए।
रयाल ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने, ग्रुप में बैठक का एजेंडा प्रसारित करने, संगठन भवन में दैनिक समाचार पत्र लगवाने आदि सुझाव दिए।
इस मौके पर संगठन के कोषाध्यक्ष केशव प्रसाद जोशी, सुंदर सिंह रावत, प्रताप सिंह रावत, श्यामलाल थपलियाल, हर्ष मनी भट्ट, भजन सिंह कैन्तुरा, कोमल दास, सुंदर सिंह नेगी, मात बर सिंह व काशीराम आदि मौजूद थे।
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