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नेपाली फार्म में रोजाना बस अड्डे जैसा माहौल, बावजूद इसके एक भी कूड़ेदान नहीं
स्वच्छता का ढिंढोरा विज्ञापनों और पोस्टरों तक सीमित, धरातल पर व्यवस्था नदारद
नेपाली फार्म, 07 अगस्त 2026: नेपाली फार्म तिराहा ऐसा प्रमुख तिराहा है, जहां रोजाना बस अड्डे जैसा माहौल बना रहता है। यहां से होकर बड़ी संख्या में यात्री, पर्यटक और श्रद्धालु अपने-अपने गंतव्यों के लिए आते-जाते हैं। चारधाम यात्रा सहित विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में भी सामने आता है।
इसके बावजूद नेपाली फार्म तिराहे पर एक भी कूड़ेदान उपलब्ध नहीं है। ऐसे में राहगीरों और यात्रियों के सामने कूड़ा डालने के लिए उचित स्थान नहीं होने के कारण स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विडंबना यह है कि सरकार और संबंधित विभाग स्वच्छता अभियान को लेकर विज्ञापनों, सोशल मीडिया पोस्ट, पोस्टरों और बैनरों के माध्यम से बड़े-बड़े दावे करते नजर आते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।
जिस स्थान पर प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है, वहां कम से कम पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान लगाए जाना और नियमित रूप से कूड़ा उठाने की व्यवस्था किया जाना आवश्यक है। यदि सार्वजनिक स्थलों पर मूलभूत स्वच्छता सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो स्वच्छ भारत और स्वच्छता अभियान के दावों का धरातल पर कितना असर है, यह आसानी से समझा जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नेपाली फार्म जैसे महत्वपूर्ण यातायात केंद्र पर गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग कूड़ेदान लगाए जाएं तथा उनकी नियमित सफाई और कूड़ा उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे क्षेत्र को स्वच्छ रखने के साथ-साथ बाहर से आने वाले यात्रियों और पर्यटकों के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा।
अब सवाल यह है कि स्वच्छता का डंका बजाने वाले जिम्मेदार विभाग नेपाली फार्म की धरातलीय तस्वीर कब बदलेंगे?
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