देहरादून में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियो की लापरवाही टोल रोड से सटे सार्वजनिक स्थल पर बनाया डंपिंग जोन
एक ओर सरकार 'स्वच्छ भारत' और 'सुरक्षित सफर' का नारा दे रही है, वहीं दूसरी ओर हर्रावाला में देहरादून हरिद्वार नेशनल हाईवे के ठीक किनारे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां भारी मात्रा में मलबा (Construction & Demolition Waste) जमा कर दिया गया है, जिससे न केवल आम नागरिकों के बैठने के लिए लगाई गई बेंच ढक गई हैं, बल्कि आवाजाही और पर्यावरण के लिए भी खतरा पैदा हो गया है, इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए हर्रावाला से कुंवावाला से आगे बढ़ते हुए लच्छी वाला टोल प्लाजा तक लगातर सड़क के किनारे आद्योगिक कूड़ा, कंक्रीट मिक्सर ट्रकों द्वारा बचा हुआ वेस्ट मटिरयल नेशनल हाइवे के साइडो में लागातार फेंका जा रहा है, इस संवेदनशील क्षेत्र में फैली गंदगी न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरा बनती जा रही है। नेशनल हाइवे से सटे हुए लच्छी वाला फारेस्ट रेज में कूड़े का अंबार लग गया है जिसके कारण इस क्षेत्र के वन एवं वन्यजीव प्राणियों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है , इस कूड़े में खाद्य प्रदार्थ की तलाश में अक्सर वन्यजीव, एवं निर्वासित पशु हाइवे के बीचो-बीच आकर दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं ।
जब इस संबंध में जागरूक नागरिक द्वारा संबंधित विभाग के अधिकारी रोहित पंवार से बात की गई, तो पहले उन्होंने जानकारी होने से ही इनकार कर दिया उसके बाद बड़ी बेरुखी से जवाब दिया गया एन. एच ए. आई अंतर्गत आने आने वाले इस नेशनल हाईवे पर यदि रोड़ों के साइड में मालवा फेंका जा रहा है तो इसमें मैं आपको क्या परेशानी है और यह किस प्रकार से गैरकानूनी है, साक्ष्य के रूप में फोटो और वीडियो भेजने पर अधिकारी का तर्क था कि "यह मलबा सर्विस लेन बनाने के लिए इकट्ठा किया गया है।" अधिकारी के द्वारा व्हाट्सएप पर भेजे गए इस जवाब से यह सवाल उठता है क्या नेशनल हाईवे के मानकों के अनुसार, पुराने मलबे (C&D Waste) से सर्विस लेन तैयार की जा सकती है? हाईवे की मुख्य सड़क से भी ज्यादा ऊंचाई तक मलबा जमा करना तकनीकी रूप से किस इंजीनियरिंग का हिस्सा है? यह ढलान और बारिश के समय हाईवे पर फिसलन का कारण बन सकता है।यदि यह आधिकारिक निर्माण सामग्री है, तो इसका भंडारण सुरक्षा मानकों के अनुसार क्यों नहीं किया गया? कुछ समय पूर्व यहाँ आम जनता के बैठने के लिए बेंच लगाई गई थीं, अब इन बेंचो पर आम आदमी का बैठना इस मलवे के कारण दुर्भर हो जाएगा और यहां पर काफी बड़ा आबादी क्षेत्र है इस मलवे से उड़ने वाली धूल आने वाले दिनों में इन रिहाइशी क्षेत्र के निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनेगी,जनता की सुविधाओं को नष्ट करने का अधिकार विभाग को किसने दिया? क्या सर्विस लेन बनाने के नाम पर शहर का कूड़ा हाईवे किनारे जमा किया जा सकता है?
गौरतलब है कि इसी स्थान पर पहले भी मलबे की डंपिंग रोकने के लिए शिकायत की गई थी, जिसके बाद विभाग ने भारी कंक्रीट के अवरोधक (Obstacles) लगाए थे ताकि डंपर वहां न पहुंच सकें। अब उन्हीं अवरोधकों के बीच में या उनके ऊपर मलबा फेंकना यह दर्शाता है कि विभाग के कुछ जिम्मेदारों के बीच तालमेल की कमी है या निर्माण कार्य में लगे रसूखदार ठेकेदारों का दबाव । हर्रावावाला की यह स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या मलबे से सड़क बनाने का कोई नया नियम आया है, या फिर यह केवल अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का एक तरीका है।
निष्कर्ष यह है कि आखिर भारी भरकम टोल चुकाने के बाद भी आम आदमी को उसके टोल के मुताबिक सुविधा कब मिलेगी, कब अधिकारी आम आदमी के प्रति अपना गैर जिम्मेदारना व्यवहार बंद करेंगे।




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