स्पष्ट एक्सप्रेस 04 अक्टूबर 2026


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एम्स में मरीजों की जेब पर एक और वार की तैयारी, मुफ्त पार्किंग फिर होगी शुल्क के हवाले

स्पष्ट एक्सप्रेस।
ऋषिकेश (एम्स), 03 अक्टूबर 2026: सस्ते इलाज की उम्मीद लेकर एम्स ऋषिकेश पहुंचने वाले मरीजों और तीमारदारों पर अब पार्किंग शुल्क का नया बोझ डालने की तैयारी है। जिस पार्किंग को मरीजों की सुविधा के लिए अब तक निशुल्क रखा गया था, उसे एक बार फिर शुल्क के दायरे में लाने की कवायद शुरू हो गई है। पार्किंग व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की बात सामने आ रही है, जिसके बाद वाहन खड़ा करने के लिए मरीजों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है।
          केंद्र सरकार के संस्थान एम्स में प्रदेश ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की संख्या भी कम नहीं है। ऐसे में अस्पताल पहुंचते ही इलाज, जांच और दवाइयों के खर्च के साथ पार्किंग शुल्क का नया खर्च मरीजों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है।
          एम्स ऋषिकेश में पहले भी पार्किंग शुल्क वसूला जाता था। लेकिन मरीजों और आम जनता के विरोध के बाद पार्किंग शुल्क व्यवस्था बंद कर दी गई थी। इसके बाद मरीजों और तीमारदारों को निशुल्क वाहन पार्किंग की सुविधा मिल रही थी। अब लंबे समय बाद दोबारा शुल्क व्यवस्था लागू करने की तैयारी ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
          एम्स में आने वाले मरीज अक्सर जांच, चिकित्सकीय परामर्श और रिपोर्ट के लिए कई घंटे अस्पताल परिसर में रहते हैं। गंभीर मरीजों के साथ उनके परिजन भी लंबे समय तक अस्पताल में मौजूद रहते हैं। ऐसे में यदि पार्किंग शुल्क लागू होता है तो एक बार का नहीं, बल्कि बार-बार अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए यह लगातार बढ़ने वाला खर्च साबित हो सकता है।एम्स जैसे केंद्रीय संस्थान में मरीज कम खर्च में बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि मरीजों को इलाज की सुविधा देने वाले अस्पताल में उनके वाहन खड़े करने पर भी शुल्क क्यों? खासकर उन मरीजों के लिए जो बीमारी के चलते पहले ही आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं।
          अब सबकी नजर एम्स प्रशासन के अगले कदम पर है। पार्किंग शुल्क की दर कितनी होगी और इसे किस तारीख से लागू किया जाएगा, इसका आधिकारिक खुलासा होना बाकी है। लेकिन इतना तय है कि मुफ्त पार्किंग खत्म होने की स्थिति में इसका सीधा असर एम्स आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों की जेब पर पड़ेगा।
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