खबर 1
रोवर्स रेंजर्स ने चलाया स्वच्छता अभियान
ऋषिकेश, 29 अप्रैल 2026: पं. ललित मोहन शर्मा परिसर ऋषिकेश के रोवर्स रेंजर्स ने कला संकाय भवन में स्थित रोवर्स रेंजर्स कार्यालय के चारों व्यापक सफाई अभियान चलाया।
रोवर रेंजर इकाई के सदस्यों ने प्रांगण में इधर उधर बिखरे प्लास्टिक, पॉलिथीन, कचरा एवं अन्य प्रकार की निष्प्रयोज्य वस्तुओं को एकत्र कर कूड़ेदान में निस्तारित किया।
इससे पूर्व समस्त छात्र-छात्राएं रोवर रेंजर कक्ष में एकत्र हुए एवं पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) को किए गए कार्य का ब्योरा जिला आयुक्त प्रो. प्रमोद कुमार कुकरेती को दिया। सीनियर रेंजर मेट आयुषी श्रीवास्तव ने बताया कि प्रत्येक रोवर रेंजर को निष्प्रयोज्य सामग्री से कोई कलात्मक वस्तु तैयार करने के लिए कहा गया था । इसी क्रम में रितिका ने नारियल की खोल से घोंसला बनाया।
श्रेया मल्ल ने बांस से निर्मित फूलदान तथा आयुषी ने पुरानी बोतलों से गमले तैयार किए।
पृथ्वी दिवस की इतिहास और महत्व के बारे में प्रो. कुकरेती ने बताया कि इसकी स्थापना एक अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने पर्यावरण शिक्षा के रूप में 1970 में की थी।
इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा हेतु समर्थन है। यह दिवस हमें पृथ्वी को विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों यथा अत्यधिक कीटनाशकों का प्रयोग विभिन्न माध्यमों से उत्सर्जित विषैला कचरा, अत्यधिक रासायनिक खाद के प्रयोग से भूमि एवं भूमिगत जल का दूषित हो जाना,
जंगलों की क्षति, वन्य जीवों का विलोपन, दूषित जल के हानिकारक प्रभाव आदि अनेक गंभीर खतरों के प्रति सचेत भी करता है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी की 22 अप्रैल 1998 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा रियो डि जेनेरियो में पृथ्वी सम्मेलन का आयोजन करना इसकी महत्ता को दर्शाता है।
वर्तमान में यह 192 देशों में मनाया जाता है तथा अब तक का सबसे बड़ा पृथ्वी दिवस वर्ष 2007 में मनाया गया था, जिसमें करोड़ों लोगों ने भाग लिया था।
परिसर निदेशक प्रोफेसर एमएस रावत ने इसे एक अनुकरणीय उदाहरण बताते हुए कहा कि युवा छात्र-छात्राओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन जन तक पहुंचेगा।
रेंजर लीडर डॉक्टर शिखा ने रोवर रेंजर के इस कार्य पर प्रसन्नता व्यक्त की।
____________________________________________________
खबर 03
एम्स ऋषिकेश में मनाया गया ‘हेड-नेक कैंसर जागरूकता माह’
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने युवाओं में कैंसर के बढ़ते मामलों पर जताई चिंता
एम्स ऋषिकेश, 29 अप्रैल 2026: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश एवं कैंसर चिकित्सा एवं रुधिर विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में अप्रैल माह के अंतर्गत ‘हेड-नेक कैंसर जागरूकता माह’ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच के महत्व को रेखांकित करना रहा।
संस्थान की निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने अपने संदेश में कहा कि हेड-नेक कैंसर केवल एक चिकित्सकीय समस्या नहीं है, बल्कि हमारी जीवनशैली का परिणाम है। यदि समय रहते जागरूकता और सावधानी बरती जाए, तो इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है। निदेशक एम्स प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि जागरूकता, संयम और समय पर जांच आदि उपाय ही इस कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं।
इस अवसर पर कैंसर चिकित्सा एवं रुधिर विज्ञान विभाग के सह आचार्य एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सहरावत ने कहा कि सिर और गर्दन का कैंसर आज भारत में तेजी से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। पहले यह बीमारी मुख्यतः 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं में इसके मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जो कि चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, इंटरनेशनल एजेंसी फ़ॉर रिसर्च ऑन कैंसर (ग्लोबोकेन- 2022) की रिपोर्ट में उल्लिखित है कि भारत में कुल 14.6 लाख से अधिक नए कैंसर मामले सामने आए हैं, जबकि कैंसर ग्रसित 9.1 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई।
इन मामलों में लिप एवं ओरल कैविटी कैंसर के 1.43 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जो पुरुषों में सबसे आम तथा कुल मिलाकर दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, मुँह, गले एवं स्वरयंत्र से जुड़े सभी कैंसरों को मिलाकर हेड-नेक कैंसर भारत में कुल कैंसर भार का लगभग 30 प्रतिशत है, जो इसे देश का सबसे बड़ा कैंसर समूह बनाता है।
विभाग के कैंसर रोग विशेषज्ञ एवं सह आचार्य डॉ. दीपक सुंदरियाल ने कहा कि इस तरह के कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे तंबाकू और शराब का सेवन इसके प्रमुख कारक हैं, जिनका संयुक्त प्रभाव कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। इसके अलावा चुभने वाला दांत, मुँह की साफ सफाई की समस्या, वायु प्रदूषण, रसायनयुक्त भोजन, तनाव और अनियमित दिनचर्या भी इस बीमारी को बढ़ावा दे रहे हैं। लिहाजा चिकित्सा विशेषज्ञ ने विशेष रूप से युवाओं को इन आदतों से दूर रहने का सुझाव दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार हेड-नेक कैंसर मुख्यतः मुँह, गले, स्वरयंत्र, नाक, साइनस और लार ग्रंथियों में विकसित होता है और लगभग 85-90 प्रतिशत स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के रूप में पाया जाता है। यह बीमारी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि व्यक्ति की बोलने, खाने और सामाजिक जीवन की क्षमता पर भी गहरा असर डालती है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य प्रतीत होते हैं, जिनमें मुँह में न भरने वाला छाला, आवाज बैठना, गले में खराश, निगलने में कठिनाई, गर्दन में गांठ या सूजन शामिल हैं। यदि यह लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो शीघ्र चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
बताया गया कि बीमारी के निदान के लिए वर्तमान में बायोप्सी, सीटी स्कैन, एमआरआई और पेट स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही उपचार के रूप में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि कैंसर का पता शुरुआती अवस्था में चल जाए, तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।
कैंसर विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि उपचार के बाद भी यदि मरीज तंबाकू और शराब जैसी आदतें नहीं छोड़ता, तो कैंसर दोबारा होने की संभावना बनी रहती है। लिहाजा इस बीमारी से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
इस दौरान विशेषज्ञों ने हेड-नेक कैंसर से बचाव के उपायों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तंबाकू और शराब से दूरी, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, मौखिक स्वच्छता जैसे उपाय इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। साथ ही समाज और सरकार को भी नशामुक्ति अभियान, स्वास्थ्य शिक्षा और नियमित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए व्यक्तिगत, संस्थागत और सामाजिक प्रयास करने होंगे।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक अंकित तिवारी, डॉ. हर्ष, डॉ. महेश, डॉ. सुनिकेश, डॉ. परिधि, डॉ. शीतल, दीपिका नेगी, अनुराग पाल, दानीराम, विनीता, आरती, हिमानी, अरविंद आदि मौजूद रहे।
____________________________________________________
खबर 04
‘दिशा’ की महत्वपूर्ण बैठक में महापौर शंभू पासवान ने संजय झील को पर्यटन के मानचित्र पर लाने व रंभा नदी के संरक्षण व पुनरुद्धार हेतु दिए सुझाव
देहरादून, 29 अप्रैल 2026: माननीय महापौर शंभू पासवान ने ‘दिशा’ बैठक में संजय झील और रंभा नदी के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण सुझाव रखे।
आज देहरादून में टिहरी गढ़वाल की माननीय सांसद श्रीमती माला राज्य लक्ष्मी शाह की अध्यक्षता में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति ‘दिशा’ की महत्वपूर्ण बैठक में प्रतिभाग करते हुए नगर निगम ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान द्वारा विशेष रूप से संजय झील को पर्यटन के मानचित्र पर लाने और रंभा नदी के संरक्षण व पुनरुद्धार हेतु अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए । उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
बैठक में जनपद के विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति, उपलब्धियों और लंबित कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई तथा लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने और विकास कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने का सुझाव भी दिया ताकि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुगमता से पहुँच सके ।
____________________________________________________
खबर 05
साईं सृजन पटल रचनात्मकता और संस्कृति का जीवंत मंच : डॉ. नंदलाल भारती
डोईवाला, 29 अप्रैल 2026: अंतरराष्ट्रीय जनजातीय लोक कलाकार डॉ. नंद लाल भारती ने साईं सृजन पटल मासिक पत्रिका के 21वें अंक का विमोचन किया । कार्यक्रम साहित्यिक ऊर्जा और रचनात्मक उत्साह से परिपूर्ण रहा।
विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. नंदलाल भारती ने कहा कि साईं सृजन पटल पत्रिका सामाजिक सरोकारों एवं मानवीय मूल्यों को समर्पित अपने सारगर्भित और सुसंस्कृत लेखन के माध्यम से पाठकों को निरंतर समृद्ध कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अंक का पाठकों को बेसब्री से इंतजार रहता है और इसकी संपादकीय दृष्टि समाज को नई दिशा प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा कि पत्रिका में प्रकाशित कविता, कहानी, शोध, संस्कृति, स्वास्थ्य एवं विविध विषयों पर आधारित सामग्री इसे अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक बनाती है। भाषा की शुद्धता और विषय की गहराई इसकी विशिष्ट पहचान है, जो इसे समय का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बनाती है।
पत्रिका के संपादक प्रोफेसर (डॉ.) के. एल. तलवाड़ ने कहा कि साईं सृजन पटल का उद्देश्य समाज में सकारात्मक सोच, रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रसार करना है। उन्होंने बताया कि पत्रिका निरंतर नए लेखकों को मंच प्रदान कर रही है और साहित्य के माध्यम से समाज को जागरूक करने का कार्य कर रही है।
उपसंपादक अंकित तिवारी ने कहा कि यह पत्रिका केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि समाज के विचारों और संवेदनाओं का दर्पण है। उन्होंने सभी लेखकों, पाठकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से ही यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है।
इस अवसर पर महासू मंदिर के पुजारी गीतकार,कवि आत्मा राम जोशी , लेखिका नीलम तलवाड़, इंसाइडी क्रिएटिव मीडिया के सीईओ अक्षत एवं उनका समर्पित स्टाफ भी उपस्थित रहा। कार्यक्रम का समापन साहित्यिक संवाद और पत्रिका के उज्ज्वल भविष्य की कामनाओं के साथ हुआ।
____________________________________________________
खबर 06
____________________________________________________
खबर 07
____________________________________________________
खबर 08


0 Comments