स्पष्ट एक्सप्रेस 13 अप्रैल 2026

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खबर 01
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खबर 02
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खबर 03
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खबर 04
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खबर 05
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खबर 06
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खबर 07
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खबर 08

पशु कल्याण बोर्ड: खबर ठंडे बस्ते की-

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खबर 09

हाईवे पर हर 100 मीटर पर बैठे हैं निराश्रित गौवंश, कालोनियों में भी 
बन रहे परेशानी का सबब बेसुध पशु कल्याण बोर्ड 

स्पष्ट एक्सप्रेस।
खैरी खुर्द, 09 अप्रैल 2026: ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में एक सवाल बार बार उठ रहा है। क्या हमारा धर्म और राष्ट्र केवल नारों और किताबों तक सीमित रह गया है? यदि हम सच में हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना करते हैं तो क्या वह हमारे संस्कारों और व्यवहार में दिखाई देता है?
          हाईवे और मुख्य सड़कों पर निराश्रित गोवंश खुले आम घूमते दिखाई देते हैं। यह स्थिति कई बार  दुर्घटनाओं का सबब बन रहे हैं।
विडंबना यह है कि गौमाता को पूजनीय मानने वाला समाज उनकी सुरक्षा और उचित देखभाल सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है।
          हाईवे पर हर 100 मीटर की दूरी पर निराश्रित गौवंश बैठे रहते हैं। जो दुर्घटना का कारण भी बन रहे हैं। जबकि पशु कल्याण बोर्ड बेसुध बना बैठा है।
          अगर हम सनातन परंपरा में गौमाता का स्थान देखें, तो उन्हें पूजनीय माना गया है, लेकिन आज की स्थिति में वही गौमाता सड़कों पर कचरा खाती, दुर्घटनाओं का शिकार होती और ट्रैफिक के बीच भटकती नजर आती। यह कहीं ना कहीं हमारी सामूहिक विफलता को दिखाता है।
          दूध देना बंद होने पर कई लोग गौवंश को सड़क पर छोड़ देते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। गौमाता की हालत दयनीय होती जा रही हैं। आस्था और वास्तविकता के बीच विरोधाभास दिख रहा है।
          सवाल यह है कि क्या सिर्फ "गौ माता की जय" बोलने या निराश्रित गौवंशों को फल-फ्रूट खिलाते हुए फोटो खिंचवाने से ही कर्तव्य पूरा हो जाता है?
          यह मुद्दा किसी धर्म का मजाक बनाने से ज्यादा, हमारी जिम्मेदारी का आईना है। 
          जब तक हम आस्था को व्यवहार में नहीं लाएंगे, तब तक गौमाताएं सड़कों पर विचरण करती नजर आती रहेंगी।
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खबर 10
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खबर 11
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खबर 12
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खबर 13
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खबर 14
स्पष्ट एक्सप्रेस।
श्यामपुर, 09 मार्च 2026: श्यामपुर स्थित बैली ब्रिज में डार्क हरा पेंट किए जाने के कारण बैली ब्रिज अंधेरा होने पर ठीक तरह से दिखाई नहीं देता, जबकि ब्रिज के स्ट्रक्चर में सफेद पेंट करना चाहिए। ना ही ब्रिज के स्ट्रक्चर पर रेडियम युक्त पट्टियां लगाई गई हैं।
इसके अलावा, बैली ब्रिज के बाद रात में चमकने वाले डेलीनेटर लगाए गए हैं। जबकि ये डेलीनेटर पुल से पहले लगाए जाने चाहिए थे। 
          ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि एनएच खंड डोईवाला अपने कार्यों के प्रति उदासीन बना हुआ है। और ना ही कभी हाईवे की  व्यवस्थाओं का जायजा लेता है। 
          एनएच ने अपने सिर्फ 2 बेलदारों के ऊपर हाईवे पर व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी छोड़ी हुई है। इस लिए ये कहना गलत नहीं होगा कि "फ्री की रोटियां तोड़ रहा है" एनएच खंड डोईवाला। 
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खबर 15

धरातल पर एनएचएआई के कारनामों की कोई सुध लेने वाला नहीं

नेपाली फार्म हाईवे पर बारिश से सड़क बन जाती है तालाब
भानियावाला चौराहे पर बारिश से सड़क बन जाती है तालाब 
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