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खबर 01
गढ़ी मयचक बारात घर से रविवार सुबह 6 बजे दौड़ का आयोजन
गढ़ी मयचक, 14 मार्च 2026: रविवार 15 मार्च को सुबह 6 बजे गढ़ी मयचक बारात घर से तीन किलोमीटर की दौड़ का आयोजन किया जा रहा है।
युवा मंगल दल द्वारा गढ़ी मयचक के ग्राम प्रधान बॉबी रांगड़ के सहयोग से उक्त दौड़ का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि गढ़ी मयचक टी प्वाइंट के समीप बारात घर से सुबह 6 बजे से तीन किमी की दौड़ आयोजित की जाएगी। इस दौड़ में कोई आयु सीमा नहीं है।
खबर 02
खेलने से रोका तो पहुंचे डीएम के पास, सुनी बात, दिए निर्देश
वॉचमैन की रोक-टोक से थे परेशान
उत्तरकाशी, 14 मार्च 2026: अपनी बात रखने के लिए न उम्र की बाधा होती है और न ही ओहदे का डर, बस जज्बा होना चाहिए। ऐसा ही कुछ उत्तरकाशी में देखने को मिला, जब कपूर मोहल्ला के छोटे बच्चे अपनी खेल की समस्या को लेकर सीधे जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के पास कलेक्ट्रेट पहुंच गए।
मिली जानकारी के अनुसार, नगर के कपूर मोहल्ला निवासी ये बच्चे हाल ही में अपनी वार्षिक परीक्षाएं समाप्त होने के बाद खुशी-खुशी पुरीखेत मैदान में खेलने जा रहे थे। लेकिन वहां तैनात वॉचमैन उन्हें गेट से ही डांटकर भगा देता था। कई बार प्रयास करने के बाद जब बच्चों के सब्र का बांध टूट गया, तो उन्होंने किसी नेता या प्रतिनिधि का सहारा लेने के बजाय खुद ही अपनी आवाज उठाने का फैसला किया।
बच्चे बिना किसी घबराहट के डीएम कार्यालय पहुंचे और अपनी पूरी आपबीती जिलाधिकारी को सुनाई। डीएम प्रशांत आर्य ने भी बच्चों के इस आत्मविश्वास की सराहना की और उनसे संक्षिप्त परिचय लिया। उन्होंने बच्चों को आश्वासन दिया कि अब उन्हें कोई नहीं रोकेगा। तत्काल कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी ने प्राचार्य महाविद्यालय को फोन कर निर्देशित किया कि छोटे बच्चों को मैदान में खेलने से किसी भी तरह न रोका जाए।
आम नागरिक अक्सर कलेक्ट्रेट जाने या अधिकारियों से मिलने में हिचकिचाते हैं, लेकिन इन नन्हे बच्चों की इस साहसी पहल की पूरे उत्तरकाशी में प्रशंसा हो रही है। डीएम के निर्देश के बाद अब बच्चे बिना किसी डर के अपने तय समय पर मैदान में खेल सकेंगे।
"बच्चे बोले- हमें खेलना है, वॉचमैन डराता है"
जिलाधिकारी से मिलते वक्त बच्चों ने बड़ी मासूमियत और निडरता से कहा कि वे बस खेलना चाहते हैं, लेकिन उन्हें गेट से ही भगा दिया जाता है। डीएम ने बच्चों को 'मस्त होकर खेलने' का आशीर्वाद दिया और खेल की सुविधा सुनिश्चित की।
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खबर 03
"सीता सखी" के तौर पर महिलाएं जुड़ी संगठन से, आगामी उत्तराखंड से 25 अप्रैल को बिहार के सीतामढ़ी जाएंगी भूमि पूजन में : अनिता ममगाईं
रायवाला में "रामायण रिसर्च काउंसिल" की हुई अहम बैठक
रायवाला, 14 मार्च 2026: रायवाला में ड्रीम वेडिंग पॉइंट में शनिवार को *रामायण रिसर्च काउंसिल* (Ramayan Research Council) उत्त्तराखण्ड प्रदेश की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। उत्तराखंड प्रदेश संयोजक और पूर्व महापौर ऋषिकेश नगर निगम अनिता ममगाईं के नेतृत्व में यह बैठक हुई। प्रदेश में यह तीसरी बैठक थी। इससे पहले ब्रह्मपुरी स्थित श्री राम तपस्थली आश्रम और फिर खांड गाँव और अब रायवाला में बैठक आयोजित की गयी। इस अवसर पर कई महिलाएं सीता सखी के तौर पर संगठन से जुडी।
रामायण रिसर्च समिति के प्रयासों से यह मंदिर का निर्माण हो रहा है। वहां मौजूद उपस्थित्ति को संबोधित करते हुए ममगाईं ने कहा, आज हमें माता जानकी का अनुसरण करना चाहिए. उनके त्याग, समर्पण,तपस्या हमें बहुत कुछ सीखने की प्रेरणा देती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जिन्हें भगवान विष्णु का सातवां तथा सर्वश्रेष्ठ अवतार माना जाता हैं। उनका उच्च धर्म युक्त निष्कलंक जीवन एक आदर्श होने के कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है। जानकी पवित्रता और पत्नी के रूप में अटूट भक्ति की प्रतीक हैं और भगवान राम की संगिनी हैं। हमें मान जानकी जो सीता मैया बनी, उनके जीवन से एक प्रेरणा मिलती है जिसका हमें अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो गया है, अब माँ जानकी /सीता माँ के भव्य मंदिर का भी निर्माण हो रहा है। यह हम सभी के लिये ख़ुशी की बात है " वहां मौजूद कई गणमान्य लोगों ने भी मां जानकी के बारे अपनी बात रखी।
उल्लेखनीय है, माता जानकी (सीता जी) मिथिला के राजा जनक की पुत्री, भगवान राम की पत्नी और देवी लक्ष्मी का अवतार हैं। उनका प्राकट्य बिहार के सीतामढ़ी (पुनौरा धाम) में हल चलाते समय भूमि से हुआ था, इसलिए उन्हें 'भूमिजा' भी कहते हैं। वे त्याग, प्रेम और मर्यादा की प्रतिमूर्ति हैं, और रामचरितमानस में संसार की जननी मानी गई हैं।
हमारा उद्देश्य अत्यंत स्पष्ट है – सनातन को सशक्त बनाना, नई पीढ़ी को संस्कारित करना और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना. काउंसिल की टीम दिन-रात साहित्यिक सृजन, चिंतन और संतों के मार्गदर्शन में कार्यरत है।
माता जानकी के बारे में मुख्य बातें:
जन्म/प्राकट्य: राजा जनक को यज्ञ भूमि में कलश से सिंहासन पर बैठी हुई पुत्री मिली थीं, जिसे उन्होंने जानकी (जनक की पुत्री) के रूप में अपनाया।
जन्मस्थान: बिहार के सीतामढ़ी जिले का पुनौरा धाम उनकी जन्मस्थली माना जाता है, जहाँ अब एक भव्य जानकी मंदिर का निर्माण हो रहा है।
पजानकी जयंती: हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (9-10 फरवरी 2026 के आसपास) को जानकी जयंती मनाई 00 है।
भक्ति और महत्व: माता जानकी की कृपा के बिना राम की कृपा प्राप्त नहीं होती, वे रामानन्दी संप्रदाय की प्रमुख देवी हैं।
पूजा: माता सीता की पूजा करने से बुद्धि निर्मल होती है, जीवन में खुशियां आती हैं और बड़े दुखों को सहन करने की ताकत मिलती है।
महत्वपूर्ण जानकारी: बिहार सरकार ने भी सीतामढ़ी में 882 करोड़ से अधिक की लागत से अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर माँ जानकी के जन्मस्थान का विकास करने की योजना को मंजूरी दी है।
उन्हें मैथिली (मिथिला की पुत्री) और भूमिजा (धरती से उत्पन्न) के नाम से भी जाना जाता है।
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खबर 04
ऋषिकेश परिसर में रोवर्स रेंजर्स ने मनाया फुलदेई लोक पर्व
ऋषिकेश, 14 मार्च 2026: पं ललित मोहन शर्मा परिसर (श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, बादशाही थौल, टिहरी गढ़वाल) ऋषिकेश के रोवर्स रेंजर्स ने फुलदेई लोक पर्व बड़े हर्षोल्लास से मनाया।
रोवर विंग के जिला आयुक्त प्रो प्रमोद कुमार कुकरेती ने बताया कि सर्व प्रथम सभी रोवर रेंजर फूलों से भरी थाल लेकर निर्देशक, प्रोफेसर महावीर सिंह रावत से मिलने गए और उन्हें इस लोकपर्व की शुभकामनाएं दी।
प्रो रावत ने सभी रोवर रेंजर को आशीर्वाद दिया व परिसर में कार्यरत सभी प्रधानाध्यापकों एवं कार्मिकों को इस अवसर पर मंगल कामनाएं प्रेषित की। इसके पश्चात सभी रोवर रेंजर वाणिज्य संकाय, कला संकाय एवं विज्ञान संकाय के प्रत्येक विभाग में गए और प्रत्येक प्रधानाध्यापक को पुष्प भेंट कर शुभकामनाएं दी।
रोवर रेंजर प्रशासनिक भवन के समस्त कर्मचारियों, पुस्तकालय के कर्मिकों, प्रयोगशालाओं में कार्यरत समस्त स्टाफ से भी मिले एवं उनके जीवन की मंगलकामना की।
रोवर रेंजर की इस पहल के प्रति प्रधानाध्यापकों में जबरदस्त उत्साह रहा। संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पूनम पाठक ने कहा कि उनकी वर्षों की सेवा में यह इस तरह का पहला मौका है। गृहविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ वंदना भंडारी ने रोवर रेंजर से कहा "धन्यवाद आज तुम लोगों ने मेरा मन प्रसन्न कर दिया।"
छात्र अधिष्ठता कल्याण, प्रो हेमलता मिश्रा एवं डॉक्टर अरुणा सूत्रधार ने खुले मन से अपनी खुशी का इजहार करते हुए छात्र-छात्राओं के मिष्ठान हेतु पैसे दिए।
इसके अतिरिक्त रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो एसपी सती, प्रो नीता जोशी, प्रयोगशाला सहायिका श्रीमती यशोदा देवी एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी मिष्ठान हेतु अंशदान दिया।
प्रो कुकरेती ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य हमारी लुप्त होती विरासत से नई पीढ़ी को अवगत कराना है।
एक समय था जब गांव आबाद थे, छोटी छोटी बच्चियां सुबह सुबह देहरी पर फूल डालते हुए उस घर के समस्त सदस्यों की खुशहाली हेतु गाती थीं, "फुल देई, क्षमा देई" किंतु अब ना वो गांव रहे और ना फुल्यारी। पर्यावरण की दृष्टि से देखें तो यह पर्व प्रकृति के सम्मान और जुड़ाव को प्रदर्शित करता है। उत्तराखंड में इसी पर्व से, "भिटौली" रस्म की शुरुआत होती है जिसमें भाई अपनी विवाहित बहनों को उपहार और मिठाई भेजते हैं।
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खबर 05
श्यामपुर बाईपास, 14 मार्च 2026: श्यामपुर बाईपास पुलिस चौकी तिराहा अंधेरे के कारण दे रहा दुर्घटना को न्योता। खबर का सीडीओ देहरादून अभिनव शाह ने लिया संज्ञान। दिया दुरुस्त करने का आश्वासन। बावजूद इसके आज 14 मार्च तक भी ढाक के तीन पात।____________________________________________________
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खबर 06
शिक्षा के मंदिर के सामने कूड़े के ढेर ने खड़े किए स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल
खैरी खुर्द, 14 मार्च 2026: ग्राम खैरी खुर्द में हाईवे किनारे स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल के ठीक सामने लगे कूड़े के ढेर ने स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस स्थान को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, वहीं उसके सामने फैली गंदगी और बदबू बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनी हुई है।
स्कूल के बाहर लंबे समय से कूड़ा जमा है। कूड़े के ढेर से उठती दुर्गंध और वहां मंडराते निराश्रित गौवंश गंदगी फैलाते रहते हैं। स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी गंदगी का दर्शन करने को मजबूर हैं।
स्थानीय अखबार ने खबर के माध्यम से संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत को इस समस्या से अवगत कराया गया है, बावजूद इसके अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। स्वच्छता और शिक्षा दोनों की बात करने वाले सिस्टम के बीच यह तस्वीर कई सवाल खड़े करती है।
खैरी खुर्द के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आशीष बिष्ट ने बताया कि इस संबंध में संज्ञान लिया जा चुका है, और मनरेगा से उक्त कार्य को दुरुस्त किया जाएगा। लेकिन बीमार सिस्टम की वजह से समय लग रहा है। उन्होंने बीमार सिस्टम का हवाला देते हुए कहा कि हमारे सिस्टम में किसी भी चीज का समाधान त्वरित नहीं होता।
अब सवाल यह है कि जब शिक्षा के मंदिर के सामने ही गंदगी का अंबार लगा हो, तो बच्चों में स्वच्छता के संस्कार कैसे विकसित होंगे?
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खबर 07
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खबर 08
श्यामपुर, 09 मार्च 2026: श्यामपुर स्थित बैली ब्रिज में डार्क हरा पेंट किए जाने के कारण बैली ब्रिज अंधेरा होने पर ठीक तरह से दिखाई नहीं देता, जबकि ब्रिज के स्ट्रक्चर में सफेद पेंट करना चाहिए। ना ही ब्रिज के स्ट्रक्चर पर रेडियम युक्त पट्टियां लगाई गई हैं।
इसके अलावा, बैली ब्रिज के बाद रात में चमकने वाले डेलीनेटर लगाए गए हैं। जबकि ये डेलीनेटर पुल से पहले लगाए जाने चाहिए थे।
ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि एनएच खंड डोईवाला अपने कार्यों के प्रति उदासीन बना हुआ है। और ना ही कभी हाईवे की व्यवस्थाओं का जायजा लेता है।
एनएच ने अपने सिर्फ 2 बेलदारों के ऊपर हाईवे पर व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी छोड़ी हुई है। इस लिए ये कहना गलत नहीं होगा कि "फ्री की रोटियां तोड़ रहा है" एनएच खंड डोईवाला।
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खबर 09
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खबर 10
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खबर 11
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