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खबर01
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खबर02
टीएचडीसी इं.लि. की क्रेडिट रेटिंग "AA +" में हुई अपग्रेड
ऋषिकेश, 13 जनवरी 2026 : टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को वित्तीय मजबूती और निरंतर विकास की महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में, मेसर्स आईसीआरए लिमिटेड, मेसर्स केयर लिमिटेड और मेसर्स इंडिया रेटिंग से क्रेडिट रेटिंग में अपग्रेड रेटिंग प्राप्त हुई है। रेटिंग एजेंसियों ने निरंतर राजस्व वृद्धि, बेहतर लाभप्रदता और मजबूत बैलेंस शीट का हवाला देते हुए कंपनी की लंबी अवधि की क्रेडिट रेटिंग को 'स्थिर' आउटलुक के साथ "AA” से बढ़ाकर "AA+" कर दिया है।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और निदेशक (वित्त), सिपन कुमार गर्ग ने पूरी टीएचडीसीआईएल टीम को बधाई दी और कहा कि क्रेडिट रेटिंग में सुधार कंपनी की मजबूत वित्तीय प्रगति और अनुशासित रणनीतिक क्रियान्वयन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बेहतर रेटिंग, परिचालन दक्षता, दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और मजबूत पूंजी संरचना के रखरखाव पर टीएचडीसीआईएल के निरंतर ध्यान का एक बाहरी प्रमाण है।
बेहतर क्रेडिट रेटिंग से टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की पूंजी बाजारों तक पहुंच और मजबूत होने, उधार लेने की लागत में संभावित कमी आने और निवेशकों का विश्वास बढ़ने की उम्मीद है। इससे भविष्य में विकास के अवसरों और रणनीतिक पहलों को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी की वित्तीय क्षमता को भी मजबूती मिलती है।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ऊर्जा क्षेत्र की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में से एक है, जिसका 3,657 मेगावाट का विविध परिचालन पोर्टफोलियो है, जिसमें जलविद्युत, पवन, सौर, पंप स्टोरेज और थर्मल पावर आदि परियोजनाएं शामिल हैं। कंपनी के पोर्टफोलियो में भारत का पहला वेरिएबल स्पीड पंप्ड स्टोरेज प्लांट भी शामिल है। मजबूत परिसंपत्ति आधार, स्थिर नकदी प्रवाह और विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन के बल पर टीएचडीसीआईएल भारत की ऊर्जा सुरक्षा अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है और साथ ही देश के ऊर्जा परिवर्तन में भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है।
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खबर07
"विकसित भारत @2047” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
ऋषिकेश, 13 जनवरी 2026: श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर, ऋषिकेश में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा “विकसित भारत @2047 : भारत की आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रगति की दिशा” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को विकसित भारत की परिकल्पना, चुनौतियों एवं संभावनाओं से अवगत कराना था।
“विकसित भारत @2047 : भारत की आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रगति की दिशा” विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य वक्ता विषय-विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार भट्ट, अर्थशास्त्र विभाग शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला ने अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. भट्ट ने कहा कि विकसित भारत @2047 केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समावेशन, समान अवसर और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, रोजगार सृजन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, शिक्षा-स्वास्थ्य सुधार पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। परिसर निदेशक एवं कार्यशाला के अध्यक्षके प्रो. महावीर सिंह रावत मैं अपने संबोधन में सामाजिक क्षेत्र पर चर्चा करते हुए उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और महिला सशक्तिकरण को विकसित भारत की मजबूत नींव बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि समावेशी विकास से ही समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाया जा सकता है।
पर्यावरणीय दृष्टि से प्रो. रावत ने सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और स्वच्छता अभियानों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के बिना आर्थिक प्रगति अधूरी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र प्रो. पुष्पांजलि आर्य ने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना केवल तेज़ आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता, समावेशी विकास और पर्यावरणीय संतुलन पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2047 तक भारत को एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने के लिए रोजगार सृजन, कौशल विकास, नवाचार और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देना आवश्यक है।कार्यशाला के संयोजक डॉ. अशोक कुमार मेंदोला ने कहा कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य तभी साकार होगा जब आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दिया जाएगा। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन, कौशल विकास और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था भारत को वैश्विक स्तर पर सशक्त कार्यशाला में प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की। । कार्यक्रम के अंत में डॉ. अशोक कुमार मेंदोला का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण की सोच को सुदृढ़ करती हैं। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति, सामाजिक संरचना और पर्यावरणीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही छात्रों को नीति निर्माण में युवाओं की भूमिका, हरित अर्थव्यवस्था और नवाचार आधारित विकास मॉडल के महत्व से अवगत कराया गया।कार्यक्रम में अर्थशास्त्र विभाग के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यशाला के समापन पर शोध छात्र छात्रा शिवानी निषाद द्वारा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और राष्ट्र निर्माण की समझ को सुदृढ़ करते हैं।
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खबर08
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