______________________________________________
खबर 1
उत्तराखंड में भू-कानून को दी गई मंजूरी
अनिल चंदोला की एक रिपोर्ट-
स्पष्ट एक्सप्रेस
देहरादून 19 फरवरी 2025: विधानसभा बजट सत्र के दूसरे दिन उत्तराखंड कैबिनेट ने भू- कानून को अपनी मंजूरी दे दी है। जो अब इसी विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। जहां से चर्चा के बाद पास होने पर यह कानून के रूप में लागू होगा। भू-कानून को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के साथ ही सरकार और भाजपा की ओर से इसका क्रेडिट लेने की भी कोशिश शुरू हो गई है। सरकार को इसका क्रेडिट मिलना भी चाहिए। लेकिन इसका क्रेडिट मोहित डिमरी, लुशन टोटरिया और बॉबी पंवार जैसे उन हजारों संघर्षशील युवाओं को भी मिलना चाहिए जिन्होंने सरकार को इसके लिए मजबूर किया। प्रदेश के हजारों युवाओं ने सड़कों पर उतरकर और उतनी ही संख्या में लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से सशक्त भू-कानून के लिए आवाज उठाई। जिसके चलते सरकार ने इसकी तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार को इसके लिए बधाई। वो इसलिए क्योंकि उन्होंने इस मामले में जन भावनाओं का सम्मान किया।
सरकार ने जब यूसीसी लागू किया तब ज्यादातर लोगों ने कहा कि उन्होंने यूसीसी मांगा ही नहीं था, उन्हें तो भू-कानून चाहिए। इसको लेकर लंबे समय से अलग-अलग मंचों पर लड़ाई लड़ी जा रही थी। मुख्यमंत्री धामी और उनकी सरकार ने आखिरकार इस बहू-प्रशिक्षित मांग पर सकारात्मक कदम उठाया है। भू-कानून को सदन में रखे जाने के बाद इसे मौजूदा स्वरूप में ही पास किया जाता है या कुछ संशोधनों के साथ यह तभी पता चल सकेगा। हालांकि, सदन में भाजपा बहुमत में है, ऐसे में इसे पास करने में किसी तरह की कोई दिक्कत होनी नहीं चाहिए।
- भू-कानून के जिस ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई है उसके प्रमुख प्रावधान क्या हैं और उनसे क्या असर पड़ेगा:
नए भू-कानून के तहत पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार द्वारा 2018 में लागू किए गए सभी प्रावधानों को नए कानून में समाप्त कर दिया गया है। कैबिनेट ने प्रदेश के ग्यारह जिलों में राज्य के बाहर के लोगों के उद्यान और खेती की जमीन खरीदने पर रोक लगा दी है। हरिद्वार और उधम सिंह नगर में रोक नहीं है।
भू-कानून में सरकार ने वर्षों से चली आ रही पहाड़ों में चकबंदी और बंदोबस्ती पर भी सहमति जताई है। कैबिनेट ने पहाड़ी इलाकों में भूमि का सही उपयोग सुनिश्चित करने और अतिक्रमण रोकने के लिए चकबंदी और बंदोबस्ती करने के प्रस्ताव पर सहमति दी है। इसके अलावा भूमि खरीद में जिलाधिकारियों के अधिकार सीमित किए गए हैं। अब जिलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से भूमि खरीद की अनुमति नहीं दे पाएंगे।
सभी मामलों में सरकार द्वारा बनाए गए पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया होगी। इसके अलावा भूमि खरीद की निगरानी ऑनलाइन पोर्टल से की जाएगी। प्रदेश में जमीन खरीद के लिए पोर्टल बनाया जाएगा, जहां राज्य के बाहर की किसी भी व्यक्ति द्वारा खरीदी गई जमीन का ब्योरा दर्ज होगा। साथ ही राज्य के बाहर के लोगों को जमीन खरीदने के लिए शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा जिससे फर्जीवाड़ा और अनियमितता को रोका जा सके। इसके साथ ही नियमित रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। सभी जिला अधिकारियों को राजस्व परिषद और शासन को नियमित रूप से भूमि खरीद से जुड़ी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
इसके साथ ही नगर निकाय सीमा के भीतर लैंड यूज को लेकर भी फैसला लिया गया है। नगर निकाय सीमा के अंतर्गत आने वाली भूमि का उपयोग केवल निर्धारित लैंड यूज के अनुसार ही किया जा सकेगा।
भू कानून के तहत एक महत्वपूर्ण क्लॉज यह भी है कि यदि किसी व्यक्ति ने नियमों के खिलाफ भूमि का उपयोग किया तो वह भूमि सरकार में निहित हो जाएगी।
सरकार के अनुसार इस नए कानून से प्रदेश में बाहरी लोगों द्वारा अंधाधुंध जमीन खरीद पर रोक लगा सकेगी। पहाड़ी क्षेत्र में भूमि का बेहतर प्रबंधन होगा जिससे राज्य के निवासियों को अधिक लाभ मिलेगा।
भूमि की कीमतों में मनमानी बढ़ोत्तरी पर नियंत्रण रहेगा और राज्य के मूलनिवासियों को भूमि खरीदने में सहूलियत होगी। सरकार को भूमि की खरीद पर अधिक नियंत्रण प्राप्त होगा जिससे अनियमितताओं पर रोक लगेगी। ये कैबिनेट में रखे गए ड्राफ्ट के प्रमुख बिंदु हैं। हालांकि, इसमें पहाड़ी क्षेत्रों की गैर कृषि या बंजर जमीन को लेकर स्पष्टता नहीं है। पहाड़ में ज्यादातर जमीनें बंजर हो चुकी हैं या पिछले सालों से हो गैर कृषि हैं। वहीं जमीनें सबसे ज्यादा बेची भी जा रही हैं।
ऐसे में उस जमीन का क्या होगा ये स्पष्ट नहीं है। हालांकि यह भी सच है कि सरकार ने भू-कानून लाकर जमीनों की अंधाधुंध खरीद पर रोक लगाने की अपनी मंशा जाहिर की है। कानून बनने के बाद इसको धरातल पर कितनी मजबूती से क्रियान्वित किया जाता है, ये कानून लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि अगर इसको ठीक से लागू किया गया और इसके प्रावधानों का कड़ाई से पालना किया गया तो पहाड़ की जमीनों को अंधाधुंध बिकने से रोका जा सकेगा। साथ ही जिस डेमोग्राफ़िक चेंज को लेकर हर स्तर पर चिंता जताई जा रही है उसे पर भी काफी हद तक अंकुश लग सकेगा।
______________________________________________
खबर- 2
खबर 3
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के एसआरटी परिसर बादशाहीथौल, में एआई, स्वास्थ्य के लिए डेटा माइनिंग और हिमालयी प्राकृतिक संसाधनों पर इंटरएक्टिव कॉन्क्लेव
टिहरी गढ़वाल, 18 फरवरी 2025: हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के एसआरटी परिसर (बादशाहीथौल) के प्राणी विज्ञान विभाग ने स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (देहरादून) के सहयोग से “स्वास्थ्य और हिमालयी प्राकृतिक संसाधनों के लिए एआई और डेटा माइनिंग” पर एक दिवसीय इंटरैक्टिव सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
इस कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बिग डेटा और मशीन लर्निंग (एमएल) की भूमिका पर चर्चा करने के लिए प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, शिक्षाविद और शोधकर्ता एक साथ आए। सम्मेलन में प्रो. आशा चंदोला-सकलानी (स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, देहरादून), डॉ. डोंग लिंग टोंग (यूटीएआर मलेशिया), डॉ. एलन जे स्टीवर्ट (स्कूल ऑफ मेडिसिन, सेंट एंड्रयूज विश्वविद्यालय, यूके), एस.आर.टी. परिसर, एच. एन. बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रो. एन.के. अग्रवाल, प्रो. आर.सी. रमोला और डॉ. एल.आर. डंगवाल ने भी सम्मेलन में इंटरैक्टिव व्याख्यान दिए। प्रो. डीके शर्मा ने जीवन विज्ञान में ए.आई. और मशीन लर्निंग के उद्देश्य और महत्व को समझाया
परिसर निदेशक प्रो. एए बौराई ने वक्ताओं का परिचय कराया और आयोजन की सफलता का आशीर्वाद दिया। प्रो. एम.एम.एस. नेगी, उप अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने शोधकर्ताओं और पी.जी. छात्रों के लिए आयोजन के महत्व पर जोर दिया। संकाय सदस्य, शोध विद्वानों, पी.जी. और यू.जी. छात्रों सहित कुल 162 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया। पी.जी. छात्रा रितिका रावत ने सम्मेलन का संचालन किया और सिखा चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। प्राणी विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं और पीजी छात्रों ने कार्यक्रम के आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लिया। डॉ. रविंद्र सिंह और डॉ. आशीष डोगरा ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए छात्रों का सूक्ष्म स्तर पर मार्गदर्शन किया।
प्राणि विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष और स्कूल ऑफ लाइफ साइंस के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर एन के अग्रवाल ने कहा कि इस सम्मेलन ने युवा शोधकर्ताओं और छात्रों को अग्रणी विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने और एआई-संचालित शोध पद्धतियों पर बहुमूल्य ज्ञान प्राप्त करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया है। कार्यक्रम के दौरान हुई चर्चाओं ने आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययनों में अंतःविषय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए सहयोगी अनुसंधान के लिए नए रास्ते खोले हैं।
______________________________________________
खबर - 4
खबर - 5
खबर - 6
जल निगम: खराब गुणवत्ता के चलते बार- बार हो रहा लीकेज, क्षतिग्रस्त फुटपाथ
खैरी खुर्द, 20 फरवरी 2025 : हाईवे किनारे फुटपाथ के नीचे बिछाई गई पाइप लाइन के जगह जगह और बार बार लीक हो जाने की वजह से जहां पीने का पानी बर्बाद हो रहा है, वहीं फुटपाथ भी क्षतिग्रस्त हो रहा है। जिस कारण सड़क किनारे गड्ढे बनते जा रहे हैं।
खैरी खुर्द लेन नं 2 के सामने तीन दिन से लीकेज की वजह से फुटपाथ पर पानी रिस रहा है, जिससे पानी की बर्बादी के साथ साथ एनएच का फुटपाथ भी क्षतिग्रस्त हो रहा है। जहां जहां लीकेज की शिकायत आई, वहां लीकेज ठीक कर दी गई पर फुटपाथ क्षतिग्रस्त कर दिया गया। जिससे गड्ढे बन गए और अब हल्की बारिश से गड्ढों में पानी इकट्ठा होने लगा है। ठेकेदार के मजदूर लीकेज ठीक करने के बाद बेतरतीब तरीके से इंटरलॉक टाइल्स बिछा रहे हैं जिसे जल निगम तो दूर ठेकेदार तक देखने की जहमत नहीं उठता। स्थानीय लोगों द्वारा जल निगम के कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
______________________________________________
खबर-7
...12 जनवरी 2024 को जिला पंचायत अध्यक्ष ने किया था उद्घाटन, गौवंश के लिए तरस रही गौशाला
खदरी खड़कमाफ़, 19 फरवरी 2025: बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में 10 लाख की गौशाला का निर्माण पैसों की बर्बादी तक सीमित नजर आ रही है। उद्घाटन करने वाले भी प्रतिक्रिया जाहिर ना करते हुए अखबारों की सुर्खियां बटोरने तक सीमित रहे।
माननीय जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान एवं जिला पंचायत सदस्य श्यामपुर संजीव चौहान द्वारा 12 जनवरी 2024 को गौशाला का उद्घाटन किया गया था, जो आज तक वीरान पड़ी है।
पूर्व में जिला पंचायत सदस्य श्यामपुर संजीव चौहान ने बताया था कि ग्राम पंचायत द्वारा गौशाला निर्माण के लिए धनराशि मांगी गई थी और कहा गया था कि इसका संचालन ग्राम पंचायत द्वारा ही किया जाएगा। जिला पंचायत देहरादून द्वारा 10 लाख की धनराशि आवंटित कर दी गई थी। अब गौशाला चलाने का जिम्मा ग्राम पंचायत का है।
लेकिन ग्राम पंचायत की उदासीनता के चलते गौशाला गोवंशों के लिए तरस रही है।
बता दें कि हाईवे से 6.5 किमी दूर ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित गौशाला बनाने के लिए जिला पंचायत द्वारा बजट आवंटित किया गया था। पॉलिटेक्निक कॉलेज से 800 मीटर पीछे गंगा तट पर गौशाला बनाई गई। जहां निराश्रित गौवंशों को रखा जाना था। जबकि उक्त स्थान पर बरसात के दिनों में हर साल बाढ़ आती है। और खैरी खुर्द हाईवे किनारे पशु अस्पताल से गौशाला लगभग 8 किमी दूर है। यदि उक्त गौशाला में पशु रखे भी जाते हैं तो इतनी दूर पशु डॉक्टर द्वारा ईलाज कर पाना भी टेढ़ी खीर है। ऐसे में उक्त स्थान पर गौशाला का निर्माण समझ से परे है।
विदित हो कि 34x47 फीट की गौशाला बनने में लगभग 6 माह लगे। खदरी खड़क माफ में 10 लाख में निर्मित गौशाला, जिसका उद्घाटन माननीय मधु चौहान एवं संजीव चौहान द्वारा 12 जनवरी 2024 में किया गया था, ताज्जुब की बात है आज भी वीरान पड़ी है।
जहां ग्राम पंचायत की उदासीनता से 10 लाख में बनी गौशाला वीरान पड़ी है, वहीं सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं गौवंश। सड़कों पर भूखे प्यासे घूम रहे निराश्रित गौवंश कभी भी दुर्घटना का शिकार बन जाते हैं। या फिर ट्रेन के नीचे आकर कट जाते हैं। किसी गौवंश की हत्या या किसी गौवंश की हाईवे पर टक्कर से मौत हो जाना, दोनों ही बातों से हिंदुत्व का घोर अनादर होता है। यदि समाज में किसी गौवंश की हत्या कर दी जाती है तो क्षेत्र में हंगामा मच जाता है। जबकि गौवंश को सड़क में भूखा प्यासा छोड़ दिया जाना, एक सोचा समझा पाप है। सड़कों पर भटक रहे निराश्रित गौवंश स्वयं तो दुर्घटना का शिकार बनते ही हैं साथ ही मनुष्य की दुर्घटना का कारण भी बनते हैं। इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए कठोर कानून की नहीं खुद को बदलना होगा और गोवंश को खुला छोड़ देने से बचाना होगा।
0 Comments