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खबर - 1
भगवान नारायण की प्राप्ति हेतु दंडवत प्रणाम करते हुए बद्रीनाथ धाम पहुंचने का किया है संकल्प
खैरी खुर्द, 14 फरवरी 2025: नारायण भगवान की प्राप्ति के लिए दंडवत प्रणाम करते हुए बद्रीनाथ धाम जाने का संकल्प लिया है बालक गिरी ने।
सुबह करीब 8:30 बजे साधु के वेश में दंडवत प्रणाम करते हुए हाईवे पर एक युवा साधु के दर्शन हुए।
चूंकि व्यक्ति की उम्र कम लग रही थी तो युवा साधु से काफी कुछ पूछने की इच्छा जाग्रत हुई।
युवा साधु से पूछने पर उन्होंने अपना नाम बालक गिरी बताया। युवा साधु ने बताया वे मथुरा के रहने वाले हैं। उनकी उम्र 32 वर्ष है। दंडवत प्रणाम करते हुए उन्होंने बद्रीनाथ धाम जाने का संकल्प लिया है।
युवा साधु से पूछा कि आपका दंडवत प्रणाम करते हुए चलने के पीछे क्या महत्वाकांक्षा है। उन्होंने कहा- महत्वाकांक्षा कुछ नहीं बस नारायण भगवान की प्राप्ति ही उनका उद्देश्य है।
युवा साधु ने चार दिन पहले हरिद्वार से दंडत प्रणाम करते हुए चलना शुरू किया था। आज पांचवें दिन सुबह तक युवा साधु बालक गिरी नेपाली फार्म तक पहुंच पाए हैं।
साधु बालक गिरी को ग्राम खैरी खुर्द में बेकरी वालों ने कुछ खाने को दिया। साधु के वेश में युवा साधु ने बताया कि इसी तरह मार्ग में लोग उन्हें पूछते रहते हैं।
बहरहाल, युवा साधु अपनी बद्रीनाथ यात्रा पर के लिए पड़े। हमारे पल्ले कुछ नहीं पड़ा, बस मन में आया "कैसे कैसे लोग रहते हैं यहां पर"!
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खबर- 2
थाना रायवाला अंतर्गत खैरी खुर्द लेन नं 4 में धर दबोचा जेब कतरा, दूसरा फरार
खैरी खुर्द, 14 फरवरी 2025: दो जेब कतरों ने एक व्यक्ति के पैसों से भरे पर्स पर हाथ साफ किया।
हुआ यूं कि श्यामपुर विस्थापित निवासी रंजीत सिंह आईडीपीएल हनुमान मंदिर से ऋषिकेश की ओर से आ रहे टैम्पो पर बैठे। जिस पर दो शातिर जेब कतरे पहले से बैठे हुए थे। जिन्हें नेपाली फार्म उतरना था।
टैम्पो में रंजीत सिंह के बगल में एक महिला बैठी थी और दूसरी तरफ शातिर जेब कतरा बैठा था। सामने वाली शीट पर दूसरा जेब कतरा बैठा था। टैम्पो जैसे ही श्यामपुर बेली ब्रिज पर पहुंचा दोनों शातिर उतरने लगे। रंजीत सिंह ने सोचा इन्हें तो नेपाली फार्म उतरना है! ये यहां क्यों उतर रहे होंगे!
दोनों शातिर बेली ब्रिज पर उतर गए। थाना रायवाला अंतर्गत कुछ दूरी पर रंजीत सिंह भी लेन नं 4 के समीप गमले वाली दुकान पर उतर कर पैसे देने लगे तो जेब में पर्स ना पाकर सकपका गए। वे तुरंत समझ गए कि उन शातिरों ने ही उनके पर्स पर हाथ साफ किया है। क्योंकि इससे पहले बगल वाला शातिर सामने बैठे दूसरे शातिर को गर्दन हिलाकर कुछ इशारा कर रहा था। वे बेली ब्रिज की तरह तेजी से जाने लगे और ब्रिज के आस पास लोगों से दो लोगों के बारे में पूछा।
लोगों ने बताया कि अभी अभी दो व्यक्ति रेल लाइन से होते हुए रायवाला की तरफ जा रहे हैं।
रंजीत सिंह भी दौड़ते हुए उनके पीछे जाने लगे। शातिर दून इंस्टीट्यूट होते हुए लेन नं 4 की तरफ जाते हुए दिखे। रंजीत सिंह ने शोर मचाकर अन्य लोगों से उन दो शातिरों को पकड़ने के लिए आवाज लगाई।
लेन नं 4 (किराए पर रह रहे युवक मोहित) ने अन्य लोगों की मदद से उन्हें पकड़ लिया। लेकिन उनमें से एक शातिर भाग निकला। दूसरे शातिर को लोगों ने पकड़कर धुनाई करनी शुरू कर दी।
इस दौरान एक व्यक्ति ने स्पष्ट एक्सप्रेस प्रतिनिधि को कॉल कर घटना की जानकारी देते हुए मौके पर बुलाया। स्पष्ट एक्सप्रेस प्रतिनिधि ने थाना रायवाला पुलिस को सूचित कर मौके पर पहुंचने को कहा। कुछ ही देर में चीता पुलिस अर्जुन राठी व रोमिल कुमार मौके पर पहुंच गए। लोगों ने उक्त शातिर जेब कतरे को पुलिस को सौंप दिया। पकड़े गए जेब कतरे ने अपना नाम फहीम और दुसरे जेब कतरे का नाम तालिब बताया। दोनों शातिर ज्वालापुर के थे।
इस दौरान रंजीत सिंह को भी थाना रायवाला बुलाया गया। इससे पहले रंजीत सिंह ने बताया के शातिर जेब कतरे ने ने उनके 6- 7 हजार रुपयों पर हाथ साफ किया है जो पकड़े गए शातिर ने अपने दूसरे शातिर को दे दिए थे।
थाना रायवाला पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मामला थाना ऋषिकेश के अंतर्गत आता है, इसलिए हमारे द्वारा उक्त जेब कतरे को थाना ऋषिकेश अंतर्गत श्यामपुर चौकी के सुपुर्द कर दिया है।
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खबर- 3
रजिस्ट्री से पूर्व किन-किन बिन्दुओं पर ध्यान रखना है, इसके लिए कार्यालयों पर लगाए जाएं फ्लैक्स : जिलाधिकारी
देहरादून, 14 फरवरी 2025: जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल ने भूमि फर्जीवाड़ा रोकने के लिए प्रभावी कार्य योजना बनाने तथा जनमानस को फर्जीवाड़े से बचाने के लिए जागरूक करने के लिए व्यवस्था बनाने के आवश्यक दिशा निर्देश दिए। राज्य का प्रथम डेडिकेटेड कम्प्यूटर कियोस्क तैयार हो गया है जल्द ही इसका लोकार्पण किया जाएगा। जनमानस को भूमि फर्जीवाड़े से बचाने के लिए जिलाधिकारी एक और अभिनव प्रयास है जो राज्य के प्रथम डेडिकेटड कम्प्यूटर कियोस्क सेन्टर तैयार किया गया है। विगत नवम्बर माह में जिलाधिकारी ने बैठक करते हुए डेडिकेटेड कम्प्यूटर कियोस्क सेन्टर तैयार करने के निर्देश दिए थे जिसके क्रम में रजिस्ट्रार कार्यालय के समीप कम्प्यूटर कियोस्क तैयार किया गया है। जिस पर सामान्य नागरिक रजिस्ट्री आफिस के समीप बने इस डेडिकेटेट क्म्प्यूटर कियोस्क, जिस पर सामान्य नागरिक ई-रिजस्ट्रेशन वेबसाईट से ले पाएंगे भूमि सम्बन्धी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
राज्य के इस प्रथम डेडिकेटेट क्म्प्यूटर कियोस्क, जिस पर सामान्य नागरिक ई-रिजस्टेशन वेबसाईट से ले पाएंगे भूमि सम्बन्धी जानकारी डेडिकेटेट क्म्प्यूटर कियोस्क के माध्यम से बिचौलियों/दलालों की चैन टूटेगी। जनमानस में जागरूकता लाने के लिए रजिस्ट्री से पूर्व किन-किन बिन्दुओं पर ध्यान रखना है, इसके लिए कार्यालयों पर लगाए जाएं फ्लैक्स। रजिस्ट्रार कार्यालय की लचर कार्यप्रणाली पर लगाई फटकार, एडीएम को एक सप्ताह के भीतर पूरी तैयारी के साथ बैठक कराने के दिए निर्देश। डीएम ने कहा अधिकतम भूमि धोखाधड़ी का मुख्य कारण जनमानस को रजिस्ट्री लैंड रिकार्ड की पूर्व जानकारी न होना है, इसका गैप पूर्ण किया जाए पूर्ण जन सूचना गैप, भूमि क्रय विक्रय से पूर्व हो खतौनी, दाखिला चैक, आईडी की हो जांच।
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खबर- 4
नगर पंचायत स्वर्गाश्रम-जौंक में बंदरों के आतंक से परेशान है लोग
स्पष्ट एक्सप्रेस।
स्वर्गाश्रम-जौंक, 14 फरवरी 2025: नगर पंचायत स्वर्गाश्रम-जौंक में बंदरों का आतंक बना हुआ है । स्थानीय लोग बंदरों के आए दिन हमले से परेशान है। लेकिन इसके बाद भी न तो नगर पंचायत प्रशासन न ही पार्क प्रशासन कोई कारवाई बंदरों के धर पकड़ को नहीं कर रहा है।
पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर स्वर्गाश्रम-जौंक जहां अक्सर पर्यटकों की आवाजाही रहती है। बावजूद इसके नगर पंचायत प्रशासन और राजाजी नेशनल पार्क गंभीर नहीं है। जिस कारण पर्यटक के अलावा स्थानीय लोग बंदरों के आतंक परेशान है। स्थानीय हेमलता बिष्ट, मनोज पयाल, बंसीलाल नौटियाल, शशि बिष्ट, सरोज कुशवाहा, सूरज नेगी का कहना है कि क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। घर के बाहर या छत पर बंदरों के झुंड आ जाते है और हमला बोल देते हैं। तब लाठी-डंडे से फटकार कर बंदरों को भगाना पड़ रहा है। यहीं नहीं होटल गेस्ट में ठहरे पर्यटकों पर ही हमला कर रहे है। समाजसेवी शिव चन्द्र राय व नीतू राय का कहना है कि बंदरों के संबंध में पार्क प्रशासन को इससे अवगत कराया जा चुका है लेकिन समस्या का निदान न होने से रोष और दहशत बन रही है। उन्होंने पार्क प्रशासन से बंदरों की समस्या से निजात दिलाने की मांग की।
इस संबंध में राजाजी नेशनल पार्क के गोहरी रेंज दारोगा देव सिंह बिष्ट का कहना है कि संबंधित क्षेत्रों में नगर पंचायत प्रशासन के सहयोग से पिंजरा लगाकर बंदरों को पकड़ने की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही विभागीय गश्ती दल को भी इनको जंगल में भगाने के लिए सक्रिय किया जाएगा। वहीं इस मामले में नगर पंचायत से अधिशासी अधिकारी अंकित राणा का कहना है कि आगामी बोर्ड बैठक में बंदरों सहित अन्य जानवरों से निजात दिलाने संबंधी कार्रवाई को प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था से इंकार किया।______________________________________________
खबर- 5
स्वेला नाले की टूटी पुलिया से बाइक सहित नाले में गिरे दो व्यक्ति, बे परवाह एनएच खंड डोईवाला
अधिकारी नहीं करते निगरानी, बेलदारों के भरोसे NH
स्पष्ट एक्सप्रेस।
खैरी खुर्द, 06 फरवरी 2025: सुबह साढ़े नौ बजे करीब हाईवे पर बाइक के सामने गौवंश के आ जाने पर बाइक सवार दो व्यक्ति स्वेला नाले की टूटी हुई पुलिया से नाले में बाइक सहित जा गिरे। दोनों व्यक्तियों को सही सलामत नाले से बाहर निकाला गया।
नेपाली फार्म की ओर से आ रहे बाइक में सवार दो व्यक्ति अपनी मध्यम गति से ऋषिकेश की ओर जा रहे थे। अचानक बाइक के सामने गौवंश आ जाने से बाइक सवार ने साइड से बाइक निकालनी चाही। जिस कारण बाइक एक अन्य स्कूटी से टकराकर स्वेला नाले की पुलिया की तरफ ढल गई। लेकिन, पुलिया का आधा हिस्सा कई सालों से टूटा होने के कारण बाइक में सवार दोनों व्यक्ति नाले में गिर पड़े, जिन्हें अन्य लोगों की मदद से नाले से निकाला गया।
कुछ देर बाद मौके पर एकत्रित व्यक्तियों ने रस्सी के सहारे बाइक को भी नाले से बाहर निकाला।
नाले में गिरे दोनों व्यक्तियों को किसी तरह की कोई चोट नहीं आई। दोनों व्यक्ति क्षतिग्रस्त बाइक को टेंपो में रखकर मैकेनिक के पास ले गए।
लोगों ने एनएच खंड डोईवाला की लापरवाही को हादसे का कारण बताया है। यदि पुलिया को जल्द ही सही नहीं किया गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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खबर- 6
किताब कौथिग के लिए अकेले लड़ रहे गढ़रत्न नेगी,प्रशासन मौन
स्पष्ट एक्सप्रेस।
श्रीनगर गढ़वाल, 14 फरवरी 2025: उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल में होने वाला किताब कैथिग इस साल नहीं होगा, इसे लेकर उत्तराखंड के लीजेंड लोक कलाकार गढ़रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी क्षुब्द हैं, और हो भी क्यों ना। आधुनिकता की अंधी दौड़ में युवा सोशल मीडिया पर क्या परोस रहे हैं, ये पाठक देख ही रहे होंगे, वहीं दूसरी तरफ संस्कृति को बचाए रखने वाली और शिक्षा की रीढ़ मानी जाने वाली किताबें हम सबसे दूर होती जा रही हैं। संस्कृति मर रही है और शासन-प्रशासन मौन साधे तमाशा देख रहा है।
गढ़वाल में किताबों को लेकर और शिक्षा के वातावरण को जिंदा रखने की कोशिश में "किताब कौथिग" आयोजित किया जाता है, लेकिन इस वर्ष विचित्र रूप से इसे होने नहीं दिया जा रहा। गढ़रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी जी इस संबंध में पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा भी जाहिर कर रहे हैं। सवाल है कि क्या सरकार को उत्तराखंड के सबसे बड़े लोक कलाकार की बात सुनाई तक नहीं दे रही? उनकी पीढ़ा नहीं महसूस हो रही? नरेन्द्र सिंह नेगी जी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सब कुछ लिख दिया है, लेकिन शिक्षा के वातावरण को बचाए रखने के संघर्ष से प्रशासन के कानों में कोई जूं नहीं रेंग रही। अलमस्त प्रशासन सुस्त सोया पड़ा है।
सरकार को नहीं दिख रही "गढ़रत्न" की पीड़ा
नेगी जी ने लिखा है.. "दगड़ियों, श्रीनगर में किताब कौथिग निरस्त करवाने में भले ही कुछ लोग कामयाब हो गये हों किन्तु पुस्तकों का महत्व समझने वाले श्रीनगर के बुद्धिजीवी, बाल साहित्य, व लोकसाहित्य प्रेमी बहुत निराश हुये हैं। इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक हेम पन्त ने बताया कि गढ़वाल विश्वविद्यालय (केन्द्रीय), रामलीला मैदान, गर्ल्स इन्टर कालेज ने लिखित अनुमति देने के बाद किसी के दबाव में आकर मौखिक रूप से मना कर दिया। हेम ने बताया कि उन्होंने छात्र संघ से भी अनुरोध किया कि यह कार्यक्रम छात्र हित में है इसे होने दें किन्तु वे नहीं माने और धमकियां देने लगे। उपजिलाधिकारी श्रीनगर ने बताया कि न तो उन्होंने अनुमति दी न निरस्त की। अब श्रीनगर के युवाओं को ही तय करना है कि वे शिक्षा के केन्द्र श्रीनगर में कैसा वातावरण बनाना/देखना चाहते हैं।
हैंसले स्य हैंसी तेरी सदानि निरैणी
आंख्यूंमा हमारी भि सदानि निरैणी अंसाधारी,
सदानि निरैण रे झ्यूंतु तेरी जमादारी।प्रशासन के मुंह पर जोरदार तमाचा
तीनों शैक्षणिक संस्थानों की परमिशन के बाद भी शिक्षा के मेले - "किताब कौथिग" का न हो पाना, अराजक समाज की निशानी है। राज्य समीक्षा की उत्तराखंड सरकार और श्रीनगर गढ़वाल के प्रशासन से यह अपील है कि "किताब कौथिग" जैसे आयोजन को निरस्त करवाने वाले लोगों को कामयाब न होने दें। वैसे भी उत्तराखंड की संस्कृति डीजे वाले गीतों तक ही सिमट के रह गई है। संस्कृति और विरासत के बारे में लंबे लच्छेदार भाषण देने से संस्कृति नहीं बचेगी। इसके लिए जमीन पर काम करना होगा। "किताब कौथिग" जैसे आयोजन अगर छात्रों की नेतागिरी में बंद होते हैं तो यह सरकार और प्रशासन के मुंह पर जोरदार तमाचा है।
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खबर- 7
प्रशासन के नाम पर शून्य:
चारधाम यात्रा पर जाने वाले देश भर के यात्री श्री सत्यनारायण मंदिर परिसर में बनी धर्मशाला और जल कुंड में स्नान कर यहां से ही चार धाम के लिए तरोताजा होकर प्रस्थान करते थे।
बाबा काली कमली वाले ने वर्ष 1532 में की थी मंदिर की स्थापना : पं. राज किशोर तिवाड़ी जी
रायवाला, 14 फरवरी 2025: लगभग 500 साल प्राचीन मंदिर के सामने से कई बार गुजरा, पर कभी यह नहीं सोचा था कि यहां देखने और समझने को इतना कुछ होगा। अब तो उस समृद्धशाली अतीत के अवशेष ही यहां दिखते हैं।
1995 से पहले तो यहां यात्रियों की चहल-पहल रहती थी। कई परिवार बसते थे और पांच किमी दूर से आती नहर आर्थिकी का बड़ा जरिया होती थी।
हरिद्वार-ऋषिकेश मार्ग पर नेपाली फार्म से कुछ पहले श्रीसत्यनारायण भगवान का मंदिर स्थित है। जो अब राजाजी नेशनल पार्क के संरक्षण में है।
वरिष्ठ पत्रकार सूरजमणि सिलस्वाल जी ने मुझे मंदिर के बारे में कुछ जानकारियां दी। चूंकि उनका जन्म मंदिर परिसर में बने आवास में ही हुआ था। इसलिए मंदिर से उनकी बचपन की यादें जुड़ी हैं।
मंदिर परिसर में पंडित राज किशोर तिवाड़ी जी ने बताया कि बाबा काली कमली वाले ने वर्ष 1532 में मंदिर की स्थापना की थी, जिसका दस्तावेजों में उल्लेख मिलता है।
चार धाम यात्रा पर जाने वाले देश भर के यात्री श्रीसत्यनारायण मंदिर परिसर में बनी धर्मशाला और जल कुंड में स्नान कर यहां से ही चार धाम के लिए तरोताजा होकर प्रस्थान करते थे। यात्रा पर जाते हुए और यात्रा से आते हुए इस कुंड में स्नान का विधान हुआ करता था।
मान्यता थी कि यहां स्नान करने से यात्री पूरी यात्रा की थकावट महसूस नहीं करते। अभी भी जलधारा के लिए ईंटों से बनाई गई नहर और पुलिया के अवशेष दिखते हैं। नहर करीब तीन फीट चौड़ी और 4 फीट गहरी थी। नहर पार करने के लिए पुलिया बनाई गई। जिसका ढांचा अभी भी मौजूद है हम काफी कोशिश के बाद भी इसे तोड़ नहीं पाए, इतना मजबूत था उस वक्त का ढांचा। वर्तमान में ना तो नहर है और ना ही कुंड। कुंड के स्थान पर फर्श बिछा दिया गया है और बीच में गरुड़ जी का मंदिर स्थापित कर दिया गया है। अभी भी मंदिर के उत्तर व दक्षिण भाग में नहर होने के अवशेष मिलते हैं। कुंड से बाहर निकलते ही नहर पर छोटा सा घाट था, जहां मंदिर परिसर में बने आवासों में रहने वाले परिवार स्नान करते थे। सिलस्वाल जी बताते हैं कि 1995 से पहले यहां तीन घराट हुआ करते थे, जिसमें से दो नियमित रूप से चलते थे।
हिमाचल प्रदेश का एक परिवार यहां रहा करता था और वही इन घराटों की देखरेख करता था। 10 किमी. दायरे के लोग हरिपुर कलां, रायवाला, दिल्ली फॉर्म, छिद्दरवाला, भल्ला फार्म, श्यामपुर सहित कई गांव के निवासी इसी घराट पर अनाज पिसवाने आया करते थे। वर्तमान में जंगल से लगे विशाल कमरे जो अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, की टीन उखड़ चुकी है। बताते हैं कि सर्दियों में यहां गुलदार बैठा रहता था। पंडित राज किशोर तिवाड़ी जी ने बताया कि आज भी दूर-दराज के यात्री आते हैं और घराट के आटे की मांग करते हैं। पर अब यहां कोई यात्री नहीं रुकता।उस समय मंदिर परिसर की आवासों में सेना से सेवारत लोगों के परिवार कुछ व्यवसाई एवं मंदिर के सेवादारों के कुल 20-22 परिवार रहा करते थे।
मंदिर परिसर वर्तमान में राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में आने की वजह से सभी परिवारों को यहां से बाहर जाना पड़ा। अब धर्मशाला एवं आवास लगभग खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। उस समय यहां कृषि विभाग का गोदाम भी हुआ करता था। आसपास की ग्राम सभाओं के किसान यहीं से बीज एवं खाद ले जाया करते थे। मंदिर में सुबह-शाम की आरती से पहले ढोल-नगाड़ा बजाया जाता था। जिसे सुनकर मंदिर परिसर व आसपास के लोगों को आरती शुरू होने की सूचना दी जाती थी। ढोल- नगाड़ा बजाने के लिए एक व्यक्ति को इस कार्य के लिए तैनात किया गया था। मंदिर में 500 साल पुराना विशाल वट का वृक्ष है, जो आपको यहां कुछ समय बिताने के लिए आमंत्रित करता है। आप जैसे ही मंदिर में प्रवेश करेंगे यहां श्री कोटेश्वर महादेव का मंदिर है। ठीक सामने से ही आप गरुड़ जी के मंदिर के दर्शन करेंगे। वट वृक्ष के सामने से होते हुए पानी और भगवान श्री सत्यनारायण जी का मंदिर है, जिसमें भगवान विष्णु मां लक्ष्मी जी के साथ विराजमान हैं।यहां भगवान के दर्शन कीजिए और उनसे की गई मनोकामना जरुर पूरी होगी, ऐसी मान्यता है।
यहां श्री शनि देव का मंदिर भी है जो गरुड़ जी के मंदिर के ठीक पीछे है।शनि देव मंदिर के पास ही कुछ कमरे बने हैं जिसमें स्नान के बाद वस्त्र बदले जाते थे। कुएं की जगह यहां लगा हैंडपंप पानी का स्रोत है। मंदिर के मुख्य द्वार के ऊपर बने कक्ष में द्वारपाल रहते थे। मुख्य द्वार से सटा एक छोटा सा स्थान है जहां जल से भरे दो मटके हुआ करते थे। मंदिर परिसर में पोस्ट ऑफिस भी संचालित होता था जिस कारण क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस को सत्यनारायण मंदिर पोस्ट ऑफिस के नाम से जाना जाता है।हालांकि अब पोस्ट ऑफिस भवन अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया है।
यहां 14 मुखी तक रुद्राक्ष के पेड़ भी हैं। कहा जाता है कि एक मुखी रुद्राक्ष प्रत्येक पेड़ पर अवश्य होता है। इतने सारे रुद्राक्ष के पेड़ों पर एक मुखी रुद्राक्ष को तलाशना बहुत मुश्किल काम है तो कभी चारधाम यात्रा पर जाएं तो सत्यनारायण मंदिर जरूर आएं।
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